ग्रामीण क्षेत्र में मिर्गी से पीड़ित केवल 10% बच्चो को ही मिल पता है उपचार

Posted On Sat, January 18, 2020, 5:36 PM
* फोर्टिस हॉस्पिटल जयपुर द्वारा दिशा फाउंडेशन के मिर्गी पीड़ित विशेष - बच्चो और अभिभावकों के लिए किया जागरूकता सत्र का आयोजन *शीघ्र निदान से मिर्गी पीड़ित बच्चो का पूर्ण उपचार संभव * डॉ शरद शर्मा, एडिशनल डायरेक्टर, शिशु मस्तिष्क रोग, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ने सत्र के पश्चात दी निशुल्क परामर्श

जयपुर, 18 जनवरी, 2020। भारत में मिर्गी काफी गंभीर समस्या है। शहरी भारत में 60% लोग दौरे पड़ने के बाद डॉक्टर से सलाह लेते हैं, ग्रामीण भारत में केवल 10% लोग ऐसा करते हैं। इस विषय को मद्देनजर रखते हुए मल्टी स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल, फोर्टिस हॉस्पिटल जयपुर द्वारा दिशा फाउंडेशन के मिर्गी पीड़ित विशेष - बच्चो और अभिभावकों के लिए किया जागरूकता सत्र का आयोजन किया और उनके माता - पिता को शामिल किया। संवादात्मक सत्र में एपिलेप्सी के लक्षण एवं उपचार, और एपिलेप्सी में न्यूरोलॉजी के महत्व आदि पर चर्चा की गई।

मिर्गी दिमाग से संबंधित एक विकार है। इस विकार के कारण बच्चों को समय-समय पर दौरे पड़ते हैं। ये दौरे तब आते हैं, जब दिमाग में अचानक रासायनिक गतिविधि में परिवर्तन होता है। यह समस्या सिर पर चोट लगने, संक्रमण, या किसी तरह की जन्म से पहले मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं के कारण भी  हो सकता है। मिर्गी का दौरा बच्चों में सबसे अधिक पाया जाता है और एक अध्यन के अनुसार दुनियाभर में बढ़ते मिर्गी के मामलों में एक चौथाई केस बच्चों से जुड़े हुए होते हैं| मिर्गी के लक्षण हर बच्चे में अलग अलग हो सकते हैं। मिर्गी के कई सामान्य लक्षण है जैसे की अचेत व बेहोश होना, मांसपेशियों में जकड़न, शरीर का पूरी तरह से हिल जाना, शरीर में सनसनाहट आदि है।

इस आयोजन की शुरुआत, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के एडिशनल डायरेक्टर- पेडियेट्रिक  न्यूरोलॉजी के डॉ. शरद शर्मा, द्वारा विशेषज्ञता सत्र के साथ हुई, उन्होंने बच्चों में एपिलेप्सी के बढ़ते मामलों के लिए एक सावधानीपूर्वक योजना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि, “एपिलेप्सी के लिए यथाशीघ्र उपचार शुरू किया जाना चाहिए, क्योंकि यह अधिक यह प्रभावी होता  है और यही कारण है कि इसके लिए संकेतों और लक्षणों की शीघ्र पहचान करना बहुत महत्वपूर्ण है।

डॉ. शरद शर्मा, ने यह भी कहाँ की ‘‘भारत में 80 % बच्चो में मिर्गी का सबसे आम कारण बुखार का दौरा होता है , जबकि 20 % बच्चो में कई अन्य कारण होते है जैसे की कैल्शियम या सोडियम की कमी के कारण, ब्रेन ट्यूमर, या  पत्तागोभी के कीड़े के कारण भी मिर्गी का दौरा पड़ सकता है | एप्लेप्सी  1 से 6 साल तक के बच्चो में होने की सम्भावना अधिक होती है | भारत में लगभग 1 % बच्चे एपिलेप्सी से ग्रैसित है | अगर किसी बच्चे को सिर्फ एक बार हि दौरा आया है तो उसका मतलब यह नहीं की बच्चे को मिर्गी है , कई बार अधिक तापमान या ख़राब खाना खाने की वजह से भी पड़ सकता है | अगर मिर्गी का दौरा एक से अधिक बार पड़ता है तो हम यह मान सकते है की बच्चे को मिर्गी हो सकती है | ऐसे मामलो में दो जाँचे, ब्रेन एम्. आर. आई. और ई. ई. जी. कराना अधिक महत्वपूर्ण है जिससे यह पता लगाया जा सकता है की मिर्गी का दौरा के कारण क्या है  यह किस प्रकार का दौरा  है, और कौन सी दवाईया कितने समय के लिए लेनी चाहिए | एप्लेप्सी को हम  80 % दवाइयों से नियंत्रित कर सकते है, एवं कुछ मामलो में ऑपरेशन ही उपाय होता है” |

 

 

 

 


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